यह बातें गुरुवार को, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में, प्रकृति-राग के विनम्र कवि आचार्य कलक्टर सिंह ‘केसरी’ की जयंती पर श्री सहाय की पुस्तक ‘ज़िन्दगी का सफ़र’ का लोकार्पण करते हुए, सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कही। उन्होंने जयंती पर केसरी जी को भी श्रद्धा पूर्वक स्मरण किया और कहा कि केसरी जी की काव्य-चेतना प्रेम, प्रकृति और जीवन के रागों से अनुप्राणित थी। उन्हें ‘केसरी’ उपनाम राष्ट्रकवि ‘दिनकर’ ने दिया था। दोनों कवियों में अद्भुत प्रीति थी। केसरी जी सम्मेलन के अध्यक्ष भी रहे।
पुस्तक का लोकार्पण करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री पद्मभूषण डा सी पी ठाकुर ने कहा कि जीवन में गति और उत्साह न हो तो उसे जीवन नहीं कहा जा सकता। ज़िंदगी का सफ़र कठिन होता है। लेकिन जो लोग जीवन के हर पक्ष को सकारात्मक दृष्टि से देखते हैं, अच्छे कार्य करते हैं, उनका जीवन आनन्दप्रद और समाजोपयोगी हो जाता है।
इस अवसर पर प्रतिभाशाली युवा साहित्यकार डा नवनीत कुमार को ‘आचार्य कलक्टर सिंह ‘केसरी’ स्मृति सम्मान’ से विभूषित किया गया ।
दूरदर्शन बिहार के कार्यक्रम-प्रमुख डा मनोज प्रभाकर, सम्मेलन के वरीय उपाध्यक्ष जियालाल आर्य, डा शंकर प्रसाद, डा पसपा जमुआर, डा अर्चना त्रिपाठी, शमा कौसर ‘शमा’, ईं आनन्द किशोर मिश्र, गोपाल कृष्ण, श्वेती, मीता कृष्ण, अरुण कुमार सिन्हा और प्रभा ज्योति ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन में वरिष्ठ शायर आरपी घायल, प्रो सुनील कुमार उपाध्याय, वसीम औरंगाबादी, डा रमाकान्त पाण्डेय, प्रो नागेंद्र शर्मा, डा प्रियंका सिन्हा, सदानन्द प्रसाद, सिद्धेश्वर, डा अनिल कुमार शर्मा, ईं अशोक कुमार, चित्तरंजन लाल भारती, रौली कुमारी, नीता सहाय, शंकर शरण आर्य, नवनीत कुमार, सुनीता रंजन , पंकज प्रियम आदि कवियों और कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। मंच का संचालन कवि ब्रह्मानन्द पाण्डेय ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन कृष्ण रंजन सिंह ने किया।
समारोह में, सम्मेलन के अर्थमंत्री प्रो सुशील कुमार झा, ईं बाँके बिहारी साव, भवन अभिरक्षक प्रवीर कुमार पंकज, प्रो राम ईश्वर पण्डित, डा चंद्रशेखर आज़ाद, प्रमोद कुमार आर्य, रंजन कुमार अमृतनिधि समेत बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन उपस्थित थे।
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