पठनीय और संग्रहणीय है प्रकृति और पर्यावरण से जुड़ी पुस्तक ‘धरती का न्याय’

हिंदी में प्रतिवर्ष हज़ारों पुस्तकें छप कर बाजार में आ रही हैं. इनमें से तीन चौथाई पुस्तकें कथा- कहानी, उपन्यास,संस्मरण ,समालोचनाओं , यात्राओं की होती हैँ. बहुत कम किताबें जीवन के अन्य क्षेत्रों से संबंधित हैं . प्रकृति, पर्यावरण आदि विषयों पर तो उंगलियों पर गिनी जाने की संख्या में पुस्तकें हैं. कुशाग्र राजेन्द्र और विनीता परमार की पुस्तक "धरती का न्याय" इस दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण पुस्तक मानी जाएगी . यह पुस्तक इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि बहुत रोचक शैली में आकर्षक ढंग से लिखी गयी इस किताब में प्रकृति और पर्यावरण से संबंधित बातों की ओर लोगों का ध्यान आकृष्ट किया गया है.

Written By : प्रमोद कुमार झा | Updated on: June 11, 2025 10:35 pm

हिंदी में प्रतिवर्ष हज़ारों पुस्तकें छप कर बाजार में आ रही हैं. इनमें से तीन चौथाई पुस्तकें कथा- कहानी, उपन्यास,संस्मरण ,समालोचनाओं , यात्राओं की होती हैं. बहुत कम किताबें जीवन के अन्य क्षेत्रों से संबंधित हैं . प्रकृति, पर्यावरण आदि विषयों पर तो उंगलियों पर गिनी जाने की संख्या में पुस्तकें हैं. कुशाग्र राजेन्द्र और विनीता परमार की पुस्तक “धरती का न्याय” इस दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण पुस्तक मानी जाएगी . यह पुस्तक इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि बहुत रोचक शैली में आकर्षक ढंग से लिखी गयी इस किताब में प्रकृति और पर्यावरण से संबंधित बातों की ओर लोगों का ध्यान आकृष्ट किया गया है.

यह पुस्तक आज के समय में एक आवश्यकता भी है! इस पुस्तक के लेखक कुशाग्र राजेन्द्र एक गंभीर शोधकर्ता हैं और पर्यावरण और प्रकृति का लगातार अध्ययन करते आ रहे हैं .संप्रति एमिटी यूनिवर्सिटी , हरियाणा में पृथ्वी और पर्यावरण विज्ञान विभाग के प्रमुख हैं. सह लेखिका विनीता परमार बर्तमान में हिंदी की लोकप्रिय लेखिका, कवयित्री हैं. हाल में ही इनकी पुस्तक “बाघ :विरासत और सरोकार'” बहुत चर्चा में है. वर्तमान में बिनीता केंद्रीय विद्यालय में विज्ञान की वरिष्ठ शिक्षिका हैं . “धरती का न्याय” पुस्तक में कुल 216 पृष्ठ हैं .लेखक द्वय ने बहुत सुरुचिपूर्ण ढंग से पुस्तक को अलग-अलग अध्यायों में विभक्त किया है जिससे पाठकों का ध्यान अलग-अलग मुद्दों की ओर आकृष्ट हो सके . कुछ अध्यायों की ओर ध्यान योग्य है. कुछ अध्याय देखिये ‘पर्यावरण और संस्कृति’ ,’जलवायु विमर्श’, ‘प्रकृति और विकास’, ‘नदी पानीऔर हम’ एवं ‘हमारे चारों ओर प्रदूषण’ इत्यादि. इन अलग अलग अध्यायों में अलग अलग विषयों पर चर्चा की गयी है. एक लघु अध्याय है “स्त्री और प्रकृति”.इसमें बहुत रोचक ढंग से स्त्री और प्रकृति के साम्य को परिभाषित किया गया है.

‘तीस्ता त्रासदी’ अध्याय में जलवायु पर विस्तार से चर्चा की गयी है. एक बहुत महत्वपूर्ण अध्याय है. ‘हमारे घर पश्चिम टेक्सचर के कॉपी पेस्ट’ में पश्चिम के अंधाधुन नकल और चिताओं की ओर ध्यान आकृष्ट किया गया है. ‘जब हम शहरों की चकाचौंध को देखते हैं तो लगता है हमारे रात के हिस्से के अंधेरे को कृत्रिम प्रकाश ने ढाँप लिया है'(पृष्ठ 212) पुस्तक की भाषा सरल ,आकर्षक एवं कौतुक उत्पन्न करने वाला है .पुस्तक पठनीय ही नहीं संग्रहणीय भी है.

पुस्तक : धरती का न्याय , प्रकाशक: सेतु प्रकाशन

लेखक: कुशाग्र राजेन्द्र और विनीता परमार, पृष्ठ: 216

प्रकाशन वर्ष: 2025, मूल्य: रु 325

(प्रमोद कुमार झा तीन दशक से अधिक समय तक आकाशवाणी और दूरदर्शन के वरिष्ठ पदों पर कार्यरत रहे. एक चर्चित अनुवादक और हिन्दी, अंग्रेजी, मैथिली के लेखक, आलोचक और कला-संस्कृति-साहित्य पर स्तंभकार हैं।)

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4 thoughts on “पठनीय और संग्रहणीय है प्रकृति और पर्यावरण से जुड़ी पुस्तक ‘धरती का न्याय’

  1. विचारणीय विषय पर प्रकाश डालती पुस्तक की बहुत सच्ची समीक्षा के लिए साधुवाद!!
    रचनाकारों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं!!

  2. एक महत्वपूर्ण, जरूरी किताब। पर्यावरण की रक्षा आवश्यकता है.
    ऐसे समय में ऐसी जरूरी पुस्तक की प्रसिद्ध लेखक की समक्षीय दृष्टि.. दोनों को बधाई!

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