बुधवार को ग्रीन-व्यू, रामनगरी स्थित दशरूपक फ़िल्म्स के सभागार में, गीत ग़ज़लों की इन्हीं हृदय-स्पर्शी पंक्तियों का श्रोताओं ने जी भर के आनन्द उठाया। अवसर था ‘दशरूपक फ़िल्म्स’ के कार्यालय एवं ‘काव्यानुशीलन मंच’ के उद्घाटन का। इस अवसर पर समारोह के मुख्यअतिथि और बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डा अनिल सुलभ का एकल काव्य-पाठ रखा गया था।
आरंभ में ‘दशरूपक फ़िल्म्स’ की निदेशक ललिता पाण्डेय एवं कवि ओम् प्रकाश पाण्डेय ने अतिथियों का अंग-वस्त्रम और पुष्प-हार से स्वागत किया। डा पाण्डेय ने बताया कि उनकी संस्था गुणवत्तापूर्ण फ़िल्मों के निर्माण एवं काव्य-अनुशीलन के लिए निष्ठापूर्वक कार्य करती रहेगी।
पाण्डेय के आग्रह पर डा अनिल सुलभ ने ‘ओ सितारों भरे आकाश’ शीर्षक रचना से अपना काव्य-पाठ आरंभ किया। अपनी एक ग़ज़ल पढ़ते हुए डा सुलभ ने कहा कि ” हमने सुना है इस सदी में पत्थर के दिल धड़केंगे/ इसीलिए जिस्मो-दिल को पत्थर बनाता जाता हूँ/ किसी रोज़ तेरे छत पर आसमां से चाँद उतरेगा/ तेरी गली में इसीलिए हर वक़्त आता जाता हूँ/ फूल में खुशबू में हर शय में, बस तू ही दिखता है/ सबके सामने झुकता हूँ, सबको गले लगाता हूँ।”
डा सुलभ के इस गीत पर कि “हृदय को कर लिया पावन, पधारो मेरी राधा जी/ मेरा तन मन हुआ सावन, पधारो मेरी राधा जी” श्रोताओं ने आनन्द विभोर होकर तालियाँ बजायी। इस गीत के अंतिम अंतरे पर कि “विरह व्याकुल हैं यमुना जी, गोवर्द्धन हो चले पत्थर/ है सूना सूना वृंदावन, पधारो मेरी राधा जी!”, श्रोताओं ने खड़े होकर अभिनन्दन किया।
पटना विश्वविद्यालय के पूर्व संकायाध्यक्ष डा अखिलानंद त्रिपाठी की अध्यक्षता में आयोजित इस समारोह में वरिष्ठ कवि प्रो सुनील कुमार उपाध्याय, वरिष्ठ लेखिका विभा रानी श्रीवास्तव, शुभ चंद्र सिन्हा, कुमार अनुपम, सुनील कुमार दूबे, शायरा शमा कौसर ‘शमा’, डा अर्चना त्रिपाठी, ईं अशोक कुमार, डा अनिता मिश्र सिद्धि, सूर्य प्रकाश उपाध्याय, इंदु भूषण सहाय, डा मनोज गोवर्द्धनपुरी, सोनी मिश्र, मृत्युंजय गोविन्द, चंदा मिश्र, डा प्रियंका बासु, रविकान्त ओझा, प्रियंका पाण्डेय, प्रियम पाण्डेय, राज आनन्द, प्रणव दूबे, दृश्य केतु, नयना, राजेश कुमार आदि प्रबुद्ध श्रोता उपस्थित थे।
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