नई दिल्ली: दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित तीन दिवसीय जश्न-ए-रेख्ता 2024 का समापन 15 दिसंबर को हुआ। 13 दिसंबर से शुरू हुए इस महोत्सव ने उर्दू भाषा, साहित्य और संस्कृति का जश्न मनाया। इस दौरान शायरियों, ग़ज़लों, सूफी संगीत और कव्वाली का भरपूर आनंद लिया गया। कार्यक्रम में कई नामचीन कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं, जिनमें सूफी गायक कैलाश खेर भी शामिल थे। उन्होंने अपने बैंड ‘कैलासा’ के साथ शानदार प्रस्तुति देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
दिल्ली से कैलाश खेर का भावनात्मक रिश्ता
कैलाश खेर ने अपने गीतों से समां बांध दिया और उनके सूफियाना अंदाज ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। प्रस्तुति के बाद कैलाश खेर ने दिल्ली और संगीत के प्रति अपने गहरे लगाव को साझा किया। उन्होंने कहा, “दिल्ली मेरी जननी है। मैं दिल्ली का हूं। मेरा दिल्ली से बहुत भावनात्मक और नॉस्टेल्जिक रिश्ता है। मैंने यहां संघर्ष किए हैं, अस्वीकृति झेली है, उपहास सहा है। लेकिन इन सबके बाद जब मुझे लोगों से इतना प्यार मिलता है, तो कभी-कभी मैं भावुक हो जाता हूं।”
कैलाश खेर का दिल्ली से यह जुड़ाव उनकी जिंदगी के उतार-चढ़ाव का गवाह है। संघर्ष के दिनों की याद करते हुए उन्होंने बताया कि किस तरह उन्होंने यहां अपने करियर की शुरुआत की और मुश्किलों का सामना किया। आज जब उन्हें अपने चाहने वालों का इतना स्नेह मिलता है, तो वह इसे एक बड़ी उपलब्धि मानते हैं।
उर्दू महोत्सव में मिली साहित्य और संगीत की सौगात
जश्न-ए-रेख्ता में इस बार उर्दू प्रेमियों को साहित्य, शायरी, संगीत और संस्कृति का बेहतरीन संगम देखने को मिला। इंटरैक्टिव सेशंस, कवि सम्मेलन, ग़ज़ल गायिकी और सूफी संगीत ने कार्यक्रम को खास बना दिया। कैलाश खेर के अलावा कई और मशहूर कलाकारों ने भी अपनी प्रस्तुतियों से महफिल में चार चांद लगाए।
यह महोत्सव उर्दू भाषा और संस्कृति के संरक्षण के उद्देश्य से आयोजित किया जाता है। हर साल इसमें हज़ारों की संख्या में लोग हिस्सा लेते हैं और उर्दू साहित्य, कला और संगीत का लुत्फ उठाते हैं।
कैलाश खेर की बातों और उनकी परफॉर्मेंस ने दर्शकों के दिलों में एक गहरी छाप छोड़ी। उनके शब्दों में दिल्ली के प्रति उनका प्रेम और संघर्ष की कहानी साफ झलकती है। उन्होंने अपनी प्रस्तुति से न केवल संगीत का जादू बिखेरा, बल्कि उर्दू के इस महोत्सव को यादगार बना दिया।
जश्न-ए-रेख्ता जैसे कार्यक्रम न सिर्फ भाषा और संस्कृति को जीवंत बनाए रखते हैं, बल्कि लोगों को एक मंच पर लाकर नई ऊर्जा का संचार भी करते हैं।
यह भी पढ़े:तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन का 73 वर्ष की उम्र में निधन
Leningrad even looking ahead we should pull the corridor Inch by
Backbiome is an advanced daily wellness supplement formulated to help support spinal comfort, reduce feelings of built-up tension, and promote freer, smoother movement throughout backbiome everyday life.