द्वितीय स्मृति पर्व पर आयोजित साहित्य सम्मलेन में महान संस्कृति-पुरुष विश्वनाथ शुक्ल ‘चंचल’ को दी गई काव्यांजलि

कौमुदी महोत्सव' और 'महामूर्ख सम्मेलन' जैसे सांस्कृतिक-उत्सवों के कारण पटना में दशाब्दियों तक सुधी नागरिकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय रहे स्मृतिशेष संस्कृति-कर्मी, पत्रकार, कवि और रंगकर्मी पं विश्वनाथ शुक्ल 'चंचल' एक महान आयोजक और 'संस्कृति-पुरुष' के रूप में सदा स्मरण किए जाते रहेंगे।

द्वितीय स्मृति पर्व पर आयोजित साहित्य सम्मलेन में महान संस्कृति-पुरुष' विश्वनाथ शुक्ल 'चंचल' को दी गई काव्यांजलि
Written By : सुनिल वर्मा | Updated on: December 12, 2024 11:40 am

  विश्वनाथ शुक्ल ‘चंचल’ द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले इन उत्सवों, शरद-पूर्णिमा के दिन भगवान श्री कृष्ण द्वारा गोपियों के साथ किए गए ‘महारास’ की स्मृति में आहूत होने वाले ‘कौमुदी महोत्सव’ और होली के अवसर पर आयोजित होनेवाले’महामूर्ख सम्मेलन’ की चर्चा संपूर्ण भारतवर्ष में हुआ करती थी, जिनका आयोजन और संचालन उन्होंने 66 वर्षों से अधिक समय तक किया। अपने जीवन के अंतिम-काल तक वे इन उत्सवों के प्राण बने रहे। उनकी अनुपस्थिति में ये दोनों उत्सव अब निष्प्राण हो गए हैं।

द्वितीय स्मृति पर्व पर आयोजित साहित्य सम्मलेन

यह बातें, सोमवार को ‘पं विश्वनाथ शुक्ल चंचल स्मृति-संस्थान’ के तत्वावधान में, उनकी द्वितीय पुण्य तिथि पर, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में आयोजित ‘स्मृति-पर्व’ की अध्यक्षता करते हुए, सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कही। उन्होंने कहा कि मुर्दा हो रहे आज के समाज में, चंचल जी एक ज़िंदा और संजीदा व्यक्ति थे। उनके मुख पर सदा खेलती मुस्कान, दुखियों को हंसाती और जीवन का संदेश देती रहती थी।
समारोह का उद्घाटन करते हुए, पूर्व केंद्रीय मंत्री डा सी पी ठाकुर ने कहा कि चंचल जी पटना सिटी के सांस्कृतिक-धड़कन थे। उनकी तरह के लोग अब बहुत कम होते हैं। वे हमारी स्मृतियों में सदैव जीवित रहेंगे।

द्वितीय स्मृति पर्व पर आयोजित साहित्य सम्मलेन

वरिष्ठ साहित्यकार एवं सम्मेलन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष जियालाल आर्य, डा शंकर प्रसाद, वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानवर्द्धन मिश्र, चंचल जी के ज्येष्ठ पुत्र और पत्रकार रजनीकांत शुक्ल, दूसरे पत्रकार पुत्र और संस्था के सचिव रविकान्त शुक्ल, विजय कुमार सिंह, पं विवेक द्विवेदी, अनिल रश्मि, आलोक चोपड़ा ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर आयोजित कवि-सम्मेलन का आरंभ चंदा मिश्र ने वाणी-वंदना से किया। वरिष्ठ कवि डा रत्नेश्वर सिंह, आचार्य विजय गुंजन, सुनील कुमार उपाध्याय, दिनेश्वर लाल ‘दिव्यांशु’, डा प्रतिभा रानी, कुमार अनुपम, डा मीना कुमारी परिहार, ऋचा वर्मा, नीता सहाय, इं अशोक कुमार, जय प्रकाश पुजारी, मृत्युंजय गोविन्द, सदानन्द प्रसाद, आदि कवियों और कवयित्रियों ने अपनी सुमधुर काव्य-रचनाओं से अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मंच का संचालन कवि ब्रह्मानन्द पाण्डेय ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन कृष्ण रंजन सिंह ने किया।
वरिष्ठ कवयित्री डा पूनम आनन्द, डा पुरुषोत्तम कुमार, डा राकेश दत्त मिश्र, डा अरुण कुमार गिरि, बसंत मिश्र, सुजित कुमार कसेरा, भास्कर त्रिपाठी, लल्लू शर्मा, रीतेश शुक्ल, समीर कुमार, धर्मेंद्र कुमार चौरसिया, प्रमोद आर्य, सागर शुक्ल, नन्दन कुमार मीत आदि प्रबुद्धजनों के समारोह में उपस्थिति रहे ।

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