तंवर, जिन्होंने पिछले पांच वर्षों में तीन अलग-अलग पार्टियों का दामन थामा था, राहुल गांधी की उपस्थिति में कांग्रेस में वापसी कर सबको चौंका दिया। यह घटनाक्रम उस वक्त हुआ, जब वह कुछ ही घंटे पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए प्रचार कर रहे थे।
कांग्रेस में वापसी करते हुए तंवर ने क्या कहा
गुरुवार दोपहर तंवर हरियाणा के जींद जिले के सफीदों में (BJP) प्रत्याशी राम कुमार गौतम (Ram Kuamr Gautam) के समर्थन में प्रचार कर रहे थे। लेकिन महज कुछ ही घंटों के बाद, वह महेंद्रगढ़ में राहुल गांधी की रैली में पहुंच गए और कांग्रेस में शामिल हो गए। तंवर (Ashok Tanwar) ने कांग्रेस में वापसी करते हुए कहा, “आज कांग्रेस छोड़े मुझे पांच साल हो गए हैं। मैंने पार्टी से दूर रहने के बाद भी कई नेताओं से संपर्क बनाए रखा। जो हुआ, वह अतीत है, अब हम सभी मिलकर हरियाणा को देश का नंबर एक राज्य बनाने की दिशा में काम करेंगे।”
कांग्रेस के करीबी सूत्रों ने क्या बताया
कांग्रेस के करीबी सूत्रों ने बताया कि तंवर लंबे समय से पार्टी नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी के संपर्क में थे। राज्य इकाई को इस फैसले की जानकारी नहीं थी। एक कांग्रेस नेता ने खुलासा किया, “तंवर (Ashok Tanwar) का कांग्रेस में वापसी का निर्णय बुधवार को अंतिम रूप दिया गया। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के साथ उनकी सीधी बातचीत थी।”
ये बीजेपी (BJP) के लिए एक बड़ा झटका था, खासकर उस समय जब तंवर ने चुनाव प्रचार के अंतिम दिन सफीदों में बीजेपी उम्मीदवार राम कुमार गौतम के समर्थन में एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया था। गौतम ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “मैं तंवर(Ashok Tanwar) के कांग्रेस में शामिल होने से हैरान हूं। उन्होंने मेरी रैली में शानदार भाषण दिया और लोगों से मेरे लिए वोट मांगे।”
तंवर(Ashok Tanwar) की कांग्रेस में वापसी से पार्टी को हरियाणा में अपनी स्थिति को मजबूत करने में मदद मिलेगी, खासकर दलित मतदाताओं के बीच। पिछले कुछ समय से विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा(Bhupendra Singh Hudda) और कांग्रेस की सिरसा सांसद कुमारी सैलजा के बीच तनाव की खबरें सामने आ रही थीं, जिससे पार्टी को “दलित विरोधी” होने का आरोप झेलना पड़ रहा था। तंवर की वापसी से इन आरोपों का मुकाबला करने में पार्टी को बल मिलेगा।
तंवर(Ashok Tanwar) की राजनीतिक यात्रा बेहद उतार-चढ़ाव भरी रही है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से पढ़ाई करने वाले तंवर को कभी कांग्रेस का उभरता हुआ युवा नेता माना जाता था। उन्होंने 2009 के लोकसभा चुनाव में सिरसा से जीत हासिल की और 2014 में हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष बने। लेकिन भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ लंबे समय तक चली खींचतान के बाद 2019 में कांग्रेस छोड़ दी।
अशोक तंवर ने कई पार्टियों का रुख किया, जिसमें तृणमूल कांग्रेस (TMC) और आम आदमी पार्टी (AAP) शामिल हैं, लेकिन अब कांग्रेस में वापसी करते हुए उन्होंने हरियाणा की राजनीति में एक बार फिर से अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी है।
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